-----------------------------------------
जो तू मुझे ना समझ पाती
सोचता है ये दीवाना,
जो तू बदल जाती, जो हमारे दरमियान दूरी आती
वो मेरा सब कुछ कह कर भी कुछ न कह पाना
या फिर खुद से ही शिकवों में सिमट कर रह जाना
तेरा जाना, जैसे मेरा मुझ ही से जुदा हो जाना
सोचता है ये दीवाना,
कि तू जो रूठ जाती, जो मुझे माफ़ ना कर पाती
तेरा ना होना भी तेरे होने का एहसास दिलाता
हर आता पल तुझे पाकर खोने का गम दे जाता
तू ही बता, बिन शमा कैसा परवाना
-- अंशुल
-----------------------------------------
तु इक पल पहले अंजानी सी
दुजे पल कुछ जानी पह्चानी थी
और अब मुझ पर इक अमिट कहानी सी
जब से तुझे मैने जाना है
तुझे अपना मैने माना है
बिन देखे ये इकरार करुं
तुझे बेइंतहा मैं प्यार करुं
मेरे जीने का तु ही एक बहाना है
हर जन्म तुझे मैने खोया है
पर इस बार मुझे तुझे पाना है
जो इस बार तु मुझसे जुदा हुई
तो समझ लेना अ सनम
मेरा ये आखिरी अफसाना है
तेरी यादों से मुझे निभाना है
और अब लौट के मुझे ना आना है
-- अंशुल
-----------------------------------------

1 comments:
March 19, 2010 at 1:41 AM
Kya Baat....... yaar tu to shayr ban Gaya
Post a Comment