तेरी याद भी कमाल करती है,
कैसे कैसे हम से सवाल करती है,
इक पल को तनहा नहीं करती मुझे
तेरी याद भी मेरा कितना ख़याल करती है
Posted by Anshul Sunday, January 31, 2010 at 9:36 AM
तेरी याद भी कमाल करती है,
कैसे कैसे हम से सवाल करती है,
इक पल को तनहा नहीं करती मुझे
तेरी याद भी मेरा कितना ख़याल करती है
चराग-ओ-आफ़ताब गुम, बड़ी हसीन रात थी
शबाब की नकाब गुम, बड़ी हसीन रात थी
तमन्ना है तेरी अगर है तमन्ना, तेरी आरजू है अगर आरजू है
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प्रेम प्रेम सब कोई कहे, प्रेम न चीन्हे कोई,
अघट प्रेम पिंजर बसे, प्रेम कहावे सोई
Interpretation:
Love, love they all say,
yet no one knows what true love is
love knows no swell or ebb,
true loves dwells deep within
Courtesy: thekabirproject (www.kabirproject.org)
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सब ठोर जमात हमारी जमात, सब ठोर पर मेला,
सब हम माय, सब हम माय, फिर भी बहुरी अकेला
Interpretation:
Everywhere, I see my community
Everywhere, a festive gathering
I am in all, all are in me
I am alone, among many
Courtesy: thekabirproject (www.kabirproject.org)
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तेरा तुझको सौंप दे, क्या लागत है मोर,
मेरा मुझमे कुछ नाही, जो होवत सो तोर