चराग-ओ-आफ़ताब गुम, बड़ी हसीन रात थी
शबाब की नकाब गुम, बड़ी हसीन रात थी

मुझे पिला रहे थे वो कि खुद ही शम्मा बुझ गयी,
गिलास गुम शराब गुम, बड़ी हसीन रात थी

लिखा था जिस किताब में, कि इश्क तो हराम है
हुई वही किताब गुम, बड़ी हसीन रात थी

लबों से लब जो मिल गए, लबों से लब जो सिल गए,
सवाल गुम जवाब गुम ,बड़ी हसीन रात थी

-- सुदर्शन फाकिर

1 comments:

  Unknown

March 8, 2010 at 2:44 AM

The most touching line of this Gazal is
"सवाल गुम जवाब गुम ,बड़ी हसीन रात थी"

wht should I say abt........